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स्वामी प्रसाद मौर्य की नई पार्टी राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी

स्वामी प्रसाद मौर्य ने 16 फरवरी 2024 को “राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी” नाम से एक नई पार्टी बनाई है। उन्होंने यह घोषणा लखनऊ में आयोजित एक रैली में की।

उन्होंने बताया कि इस पार्टी का गठन उन लोगों के लिए किया गया है जो समाज में शोषित और वंचित हैं। उन्होंने कहा कि यह पार्टी सभी जातियों, धर्मों और समुदायों के लोगों को एकजुट करेगी और उनके अधिकारों के लिए लड़ेगी।

यह स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा बनाई गई दूसरी पार्टी है। 2016 में, उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से अलग होने के बाद “लोकतांत्रिक बहुजन मंच” नामक एक पार्टी बनाई थी। बाद में, वह 2017 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे।

2022 के विधानसभा चुनावों से पहले, वह समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल हो गए थे। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले, उन्होंने सपा से इस्तीफा दे दिया और अपनी नई पार्टी बनाई।

यह देखना बाकी है कि स्वामी प्रसाद मौर्य की नई पार्टी उत्तर प्रदेश की राजनीति में कितना प्रभाव डाल पाएगी।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने 15 फरवरी 2024 को समाजवादी पार्टी से इस्तीफा देने के बाद 16 फरवरी 2024 को “राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी” (आरएसएसपी) नामक नई पार्टी बनाई है।

पार्टी बनाने के प्रमुख कारण:

  • विवादित टिप्पणी: मौर्य ने रामचरितमानस को लेकर कुछ टिप्पणी की थी, जिसके बाद उनपर सपा से निलंबन की तलवार लटक रही थी।
  • राजनीतिक महत्वाकांक्षा: मौर्य को लगता था कि सपा में उन्हें पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा था।
  • अपना दल (कमेरावादी) से गठबंधन: मौर्य का अपनी दल (कमेरावादी) के साथ गठबंधन करने का इरादा है, जिसके नेता ओम प्रकाश राजभर भी पिछड़ों की राजनीति करते हैं।

आरएसएसपी के लक्ष्य:

  • पिछड़ों, दलितों, और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की लड़ाई: मौर्य का कहना है कि आरएसएसपी इन वर्गों के लोगों को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए काम करेगी।
  • उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन: मौर्य का लक्ष्य 2024 के विधानसभा चुनाव में सपा और भाजपा को हराकर अपनी पार्टी की सरकार बनाना है।

आरएसएसपी का भविष्य:

यह कहना मुश्किल है कि आरएसएसपी कितनी सफल होगी। मौर्य एक अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं और उनके पास पिछड़ों का एक बड़ा वोट बैंक है।

यहाँ कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं:

  • मौर्य ने कहा है कि आरएसएसपी “सभी वर्गों के लोगों” का प्रतिनिधित्व करेगी।
  • उन्होंने यह भी कहा है कि आरएसएसपी “भाजपा और सपा के विकल्प” के रूप में उभरेगी।
  • आरएसएसपी का चुनाव चिह्न अभी घोषित नहीं किया गया है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि आरएसएसपी उत्तर प्रदेश की राजनीति में कितना प्रभाव डाल पाती है।

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